तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें

कभी विश्व गुरु रहे भारत की धर्म संस्कृति की पताका, विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये कभी श्रापित हनुमान अपनी शक्तिओं का विस्मरण कर चुके थे, जामवंत जी के स्मरण कराने पर वे राक्षसी शक्तियों को परास्त करते हैंआज अपनी संस्कृति, परम्पराएँ, इतिहास, शक्तियों व क्षमताओं को विस्मृत व कलंकित करते इस समाज को विश्व कल्याणार्थ राह दिखायेगा युग दर्पण सार्थक और सटीक जानकारी का दर्पण तिलक (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र-तिलक संपादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS 09911111611, 9999777358.

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Wednesday, December 5, 2012

रामसेवको को ससम्मान श्रद्धांजलि ।

राम जन्म स्थल पर, पूज्य रामसेवको के देवलोक गमन पर,  ससम्मान श्रद्धांजलि ।

हंसी भी आती है 
होती है वेदना भी। 
वो संविधान, 
जिस पर 
मेरे जैसे 
राम वाले ने 
ना कभी अंगूठा लगाया 
ना हस्ताक्षर किये, 
महाजन की हुंडी सा 
हर सांस पर लगान वसूलता ;
धर्म-निरपेक्षता के (शर्म-निरपेक्षता)
अर्थ, तक नहीं जानता जो 
बिठाता है (?)
न्याय की कुर्सियों पर 
भिश्तियों और गुलामों को !!
वहाँ 
मेरे राम का न्याय होगा। 
एक वीभत्स प्रहसन है।। 
स्वाहा हो चुके 
राम सेवको की लाशो पर 
रोटिया सकते दल 
राम और रामायण की 
प्रासंगिकता को नकारते 
वोटो की खातिर (दलाल)
आत्मा तक बेच चुके जो, 
वो (?)
पहरे लगाते है।। 
जानते नहीं 
कितने राम 
बसते है 
हर हिन्दू ह्रदय में ??
जो जानता है 
वो हसता है
अधम वर्णसंकर जमात पर; 
जो काबिज है 
पदों पर 
मीडिया पर 
न्यायालयों में।। 
चौखट चूमती 
अपराधियों 
और 
बलात्कारियों की 
जूठन खाती 
लिजलिजी व्यवस्था ;
एक कोढ़ है 
मेरे भारत पर।। 
और 
ये सब 
देखते मेरे राम 
मौन बैठे है 
समुद्र तट पर, 
राह माँगते। 
और दुष्ट रावण 
अट्टहास करता 
इसे समझ बैठा है 
पराजय।।
अब विभीषण जागे है 
अब राम को 
क्रोध भी आया है ,
बाण तुणीर से धनुष तक 
आते ही ,
सागर देगा 
स्वयं राह 
ये तय है। 
बाकी सब लीला है 
और  
आज राक्षस 
अट्टहास करते है, 
क्योंकि 
थोड़े ही प्राण बाकी है।। 
- जय श्री राम !
source: Tarun's Diary
हिन्दू धर्म की निशानियों के लिए, लड़कपन में ही जान लुटा चुके वानर वीरो तुल्य पूज्य रामसेवको के देवलोक गमन पर,  ससम्मान श्रद्धांजलि ।
"मुझे गर्व है कि मैं राम को मानता हूँ , मुझे संतोष है कि मैं धर्म को जानता हूँ " 
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है - इस देश को लुटने से बचाने तथा बिकाऊ मेकालेवादी, मीडिया का एक मात्र सार्थक, व्यापक, विकल्प -राष्ट्र वादी मीडिया |अँधेरे के साम्राज्य से बाहर का एक मार्ग...remain connected to -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS. तिलक रेलन 9911111611 ... yugdarpan.com
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका; विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक
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