तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें

कभी विश्व गुरु रहे भारत की धर्म संस्कृति की पताका, विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये कभी श्रापित हनुमान अपनी शक्तिओं का विस्मरण कर चुके थे, जामवंत जी के स्मरण कराने पर वे राक्षसी शक्तियों को परास्त करते हैंआज अपनी संस्कृति, परम्पराएँ, इतिहास, शक्तियों व क्षमताओं को विस्मृत व कलंकित करते इस समाज को विश्व कल्याणार्थ राह दिखायेगा युग दर्पण सार्थक और सटीक जानकारी का दर्पण तिलक (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र-तिलक संपादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS 09911111611, 9999777358.

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Thursday, December 31, 2015

भड़काऊ कपड़ों में मंदिर प्रवेश वर्जित

तमिलनाडु के मंदिरों में जनवरी से श्रद्धालू - परिधान 
युदस 
31 दिसं 15 मदुरै 


वाराणसी के काशी विश्वनाथ दर्शन के लिए साड़ी पहनना पहले ही अनिवार्य है।  यह नियम विदेशी महिलाओं पर भी लागू है। मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेसकोड 'वेश मानक' लागू कर दिया गया है। 
मंदिर प्रशासन की ओर से यह कदम विदेशी सैलानियों के कम कपड़ों में मंदिर में आने के चलते उठाया गया है।  इसके तहत सुरक्षाकर्मियों को कड़ाई से निगरानी रखने को कहा गया है। 
मंदिर प्रशासन ने भड़काऊ कपड़े पहनकर मंदिर में घुसने पर पाबंदी लगा दी है। 
तमिलनाडु में विभिन्न मंदिरों में दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को एक जनवरी से नए 'वेश मानक' का पालन करना होगा। तमिलनाडू मंदिर प्रवेश अधिनियम की धारा 4, व अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में कई तीर्थस्थलों के सूचना पट्ट पर चिपकाई गई सूचना है कि इस माह के आरम्भ में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करते हुए, मंदिरों ने इस ड्रेस कोड 'वेश मानक' को लागू किया है। पलानी मंदिर के बाहर लगी सूचना के अनुसार पुरूष श्रद्धालुओं को धोती, शर्ट, पायजामा या पैंट-शर्ट पहनने का सुझाव दिया गया है जबकि महिला श्रद्धालुओं से साड़ी या चूड़ीदार या ‘आधी साड़ी’ के साथ ‘पावाडई’ पहनने का आग्रह किया गया है।
इसमें बताया गया है कि जो श्रद्धालु लुंगी, बरमुडा, जींस और कसी हुई लैगिंग्स पहनकर आएंगे उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि अन्य मुख्य मंदिरों ने इस संबंध में सूचना जारी की है। इनमें रामेश्वरम और मीनाक्षी मंदिर भी शामिल हैं। मद्रास उच्च न्यायालय ने एक दिसंबर को अपने निर्णय में राज्य सरकार और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ धर्मादा विभाग को आदेश दिया था कि वह मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 'वेश मानक' लागू करें, ताकि मंदिरों में आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ाया जा सके। 

एक याचिका का निपटारा करते हुए न्यायाधीश एस. विद्यानाथन ने कहा था, ‘‘सार्वजनिक पूजा के लिए कोई परिधान होना चाहिए और सामान्यत: यह उपयुक्त ही जान पड़ता है।’’ उन्होंने कहा कि विभाग को मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए 'वेश मानक' लागू करने के लिए विचार करना चाहिए। महिला और पुरूषों के साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए भी 'वेश मानक' के तहत पूरी तरह से ढंके हुए वस्त्र पहनने का सुझाव दिया था।

कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक 

Tuesday, December 29, 2015

आई एस आई एस का भर्ती केंद्र -उल्टा प्रदेश

आई एस आई एस का भर्ती केंद्र -उल्टा प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री मोहम्मद आजम खां मुस्लिम समुदाय का नेता बनने की आकांक्षा में नित्य प्रति जो वातावरण विषाक्त कर रहे हैं, उसके चलते विधानसभा चुनाव के पूर्व राज्य के वातावरण में सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा मिल रहा है। आजम खां ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए मुसलमानों को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया है। कानून के अनुसार सांप्रदायिक आधार पर एकजुटता की अभिव्यक्ति अपराध है। जिस व्यक्ति ने ''सबके साथ न्याय'' की संवैधानिक शपथ ली हो, उसके द्वारा ऐसी अभिव्यक्ति नितांत अनुचित व महाअपराध बन जाता है। उसे मंत्री रहने का कोई अधिकार नहीं है। उनके वक्तव्य की प्रतिक्रिया में ही हिन्दू महासभा के एक कथित नेता ने पैगम्बर मोहम्मद साहब के बारे में ऐसी अभिव्यक्ति कर दी, जिससे सारा मुस्लिम समाज उत्तेजित हो उठा।
आजम खां ने राज्य सरकार के कई सौ करोड़ के बजट से मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम से एक ''विश्वविद्यालय'' स्थापित किया है, जिसके वे आजीवन चांसलर होंगे और उनकी पत्नी सचिव। जिन्हें इतिहास का ज्ञान है, वे यह जानते हैं कि अंग्रेजों ने 1902 में, बंगाल को दो भागों में बांटने का निर्णय कर दिया था। उसके विरुद्ध हिन्दू और मुसलमान एकजुट हो गए और अंग्रेजों को अपना निर्णय वापिस लेना पड़ा था। 1857 के बाद इस अभूतपूर्व एकजुटता से घबराए अंग्रेजो ने इस एकता को तोड़ने के लिए 1906 में ढाका के नवाब को मुखौटा बनाकर मुस्लिम लीग की स्थापना करवाई। जिसके पहले सम्मेलन में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने ''ग्रीन चार्टर'' पेशकर मुस्लिम बहुल प्रदेशों की रचना का प्रस्ताव किया और प्रथम गोलमेज सम्मेलन के पूर्व इंगलैंड के गृह सचिव को पत्र लिखित चेतावनी दी कि यदि प्रदेशों की रचना नहीं हुई, तो खून की नदियां बह जाएगी। मौलाना तो चले गए किन्तु मुस्लिम बहुल आबादी का पाकिस्तान बनाने के लिए कितना रक्तपात हुआ है, उसके प्रत्यक्षदर्शी अभी भी जीवित हैं। मौलाना को महत्मा गांधी ने ''हिन्दू मुस्लिम एकता'' के लिए कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनाया था, जिन्होंने बाद में एक ''मुस्लिम गुण्डे'' को गांधी से बेहतर बताया था। अपनी वाचलता से घृणा का भँवर लाने वाले मौलाना मुस्लिम लीग में भी नहीं रहे। गोलमेज सम्मेलन में वे ''मुसलमानों'' का प्रतिनिधित्व करने के लिए अलग से पहुंचे थे, किन्तु सम्मेलन के पहले ही उनका निधन हो गया। भारत में दफनाया जाना उनको पसंद नहीं था, वे मक्का में दफनाया जाना चाहते थे, किन्तु वहां की सरकार ने इसके लिए अनुमति नहीं दी। तब संभवतः उनको यमन में दफनाया गया। 
समय समय पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष के लिए सिरदर्द बनने के बाद भी अखिलेश मंत्रिमंडल के सदस्य आजम खां के प्रेरक मौलाना जौहर ही हैं। वह समय समय पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह को घुटने टेकने या अपमानित कर, यह प्रमाण देते रहते हैं कि मुख्यमंत्री कोई हो शासन उनका ही चलता है। अब तो उन्होंने दावा किया है कि वे प्रधानमंत्री बनेंगे और मुलायम सिंह यादव ही उनके नाम का प्रस्ताव करेंगे। 
अनेकानेक उत्तेजित करने वाली अभिव्यक्तियों के बीच, अभी उन्होंने यह कह डाला कि 2002 में गुजरात की जैसी स्थिति थी, वैसी इस समय सारे देश में पैदा हो गई है। ज्ञात हो कि गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी में सवार 69 कारसेवकों को जीवित जला देने की घटना के बाद वहां दंगा भड़का था, जिसमें कई सौ लोग मारे गए थे। तो क्या देश में ऐसा वातावरण है कि गोधरा दोहराया जायेगा और उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप भीषण दंगा होगा? पाकिस्तान प्रेरित अनेक संगठनों के लिए बारकुनों की भर्ती का सबसे उपयुक्त स्थान बना उत्तर प्रदेश इस समय इस्लामिक स्टेट संगठन के लिए भर्ती का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। आजमगढ़ और सम्भल जनपदों में उनकी गतिविधियों के जो प्रयास प्रगट हुए हैं, उससे मुस्लिम समुदाय भी चिंतित है।

सामूहिक रूप से जब मुस्लिमों ने पेरिस में हुए हमले की भर्त्सना करते हुए इस्लाम की शांति का संदेश दिया तो आजम खां ने आईएस समर्थक होना पसंद किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कांड किस बात की प्रतिक्रिया है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए। आजम खां मुसलमानों में लोकप्रिय नहीं हैं। समाजवादी पार्टी में ही जो मुसलमान हैं, वे उनको नेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं। दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम हों या फिर बरेलवी पंथ के लोग, आजम खां से उनका छत्तीस का सम्बन्ध रहा है, आज भी है। शिया समुदाय के लोग तो उन्हें अपना सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं। ऐसे वातावरण में मुस्लिम नेता बनने के लिए उन्होंने कटु अभिव्यक्तियों के माध्यम से उत्तेजना फैलाकर मुसलमानों का नेतृत्व संभालने का जो अभियान चलाया है, उसकी प्रतिक्रिया भी हुई है।
ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि स्पष्ट संकेत देने का साहस मुस्लिम समाज में है क्या ? 
इतिहास साक्षी है कि इस्लामिक कट्टर पंथ के समक्ष, हिन्दू समाज का चिंतन सदा मानवीय रहा है और परिस्थितिवश कभी आत्मरक्षा का भाव आवेश का कारण बना भी, तो उसे भी अनुचित न होते हुए भी, हिन्दुओं ने ही उसे सबसे पहले अनुचित ठहरा दिया। इस विरोध में सांप्रदायिक सद्भाव के नाम वे राष्ट्रद्रोह की सीमा तक चले गए। अब देखना यह है कि सांप्रदायिक सद्भाव और एकता के लिए भारत का मुसलमान आज़म खान का विरोध करता है या नहीं और किस सीमा तक जा कर। 
विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया |
इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक

Monday, December 21, 2015

राम मंदिर अयोध्या, विहिप और शर्मनिरपेक्ष व्यवस्था

राम मंदिर अयोध्या, विहिप और शर्मनिरपेक्ष व्यवस्था 
तिलक  
21 दिसं  15 न दि  
जय श्री राम, विश्व हिंदू परिषद (विहपि) की ओर से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु देशभर से पत्थर इकट्ठा करने का राष्ट्रव्यापी अभियान घोषित करने के प्राय: छह माह बाद, रविवार को पत्थरों से लदे दो ट्रकों के शहर में प्रवेश करने पर जिला पुलिस सतर्क हो गई और स्थिति पर ध्यान रख रही है। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा, ‘‘अयोध्या में विहिप की संपत्ति राम सेवक पुरम में दो ट्रकों से पत्थर उतारे गये हैं और राम जन्म भूमि के अध्यक्ष महंत नृत्य दास की ओर से ‘शिला पूजन’ किया गया है।’’ इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 
इस बीच, महंत नृत्य गोपाल दास ने बताया कि मोदी सरकार से ‘‘संकेत’’ मिले हैं कि मंदिर का निर्माण ‘‘अब’’ कराया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण किया जाये। आज अयोध्या में ढेर सारे पत्थर पहुंच गये हैं। अब पत्थरों का पहुंचना जारी रहेगा।" विहिप मुख्यालय पर पत्थरों के पहुंचने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फैजाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मोहित गुप्ता ने कहा, ‘‘हम हालात पर पैनी निगाह रख रहे हैं। पत्थर लाए गए हैं और एक निजी परिसर में रखे गए हैं। इस घटना से यदि शांति भंग होती है या सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ता है, तो हम निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे।’’ 
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का अपना प्रण दोहराते हुए विहिप ने जून में घोषित किया था कि वह मंदिर निर्माण के लिए देश भर से पत्थर इकट्ठा करेगी। विहिप ने मुस्लिम समुदाय को भी चेतावनी दी थी कि वह राम मंदिर निर्माण में कोई अड़ंगा न लगाए। विहिप के दिवंगत नेता अशोक सिंघल ने गत माह कहा था, ‘‘राम मंदिर निर्माण के लिए प्राय: 2.25 लाख क्यूबिक फुट पत्थरों की आवश्यकता है और प्राय: 1.25 लाख क्यूबिक फुट पत्थर अयोध्या स्थित विहिप मुख्यालय में तैयार रखे हैं। शेष एक लाख क्यूबिक फुट पत्थर देश भर से हिंदू श्रद्धालुओं से इकट्ठा किए जाएंगे।’’
एक ओर हमारी शर्म निरपेक्ष व्यवस्था के प्रशासन ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि वह इस कदम का विरोध करेगा, क्योंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के प्रमुख सचिव देवाशीष पांडा ने कहा था कि राज्य सरकार राम मंदिर के लिए अयोध्या में पत्थर नहीं आने देगी। उन्होंने कहा था, ‘‘चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, अत: सरकार अयोध्या मुद्दे के बारे कोई नई परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं देगी।’’
दूसरी ओर देश के मुस्लिम समाज की बदलती सोच है जिसमे BAP की अध्यक्षा, नज्मा प्रवीन ने कहा कि यदि मुस्लिम से सम्मान व प्रगति चाहते हैं तो करोड़ों हिन्दुओं की राम के प्रति श्रद्धा से खेल कर नहीं, उसका सम्मान करते, घृणा के स्थाई अंत के लिए राम की जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण में सहभागी बन सद्भाव के प्रति उन्हें भी रूचि दिखाने का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। 
एक अन्य हैं मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्षा, नाज़नीन अंसारी कहती हैं, "राम से युद्ध करनेवाले रावण को लोगों ने माफ़ नहीं किया, तो राम मंदिर को तोड़ने वाले बाबर और उसके समर्थकों को लोग कैसे माफ़ करेंगे?  तथा नाज़नीन अंसारी के अनुसार मंगोल आक्रमणकारी बाबर के पूर्वज हलाकू ने 1258 में बगदाद के खलीफा सहित हजारों मुसलमानों की हत्या की थी तथा बाबर ने 1528 में राम मंदिर तोड़ कर घृणा के बीज बोये थे। सब जानते हैं भारतीय मुसलमानों का मंगोल से कोई सम्बन्ध नहीं है। इस प्रकार मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले हिन्दू तो क्या मुसलमानों के भी हितचिंतक नहीं शत्रु हैं। 
दशकों की खुदाई और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने बिना शक के साबित कर दिया कि मंदिर को नष्ट करके मस्जिद के निर्माण में बाबर का एक नापाक हित था। जिस प्रकार आक्रान्ताओं ने अन्य सहस्त्रों मंदिरों का  विध्वंस किया था। इन तथ्यों से स्पष्ट है कि मस्जिद से पूर्व वहां मंदिर था। अत: अब इलाहबाद उच्च न्यायालय को न्यायोचित निर्णय देने में विलम्ब का कोई कारण नहीं रहा। 
आप बताएं कि आप बाबर समर्थक शर्मनिरपेक्षता के साथ हैं ? अन्यथा मंदिर विरोधी शर्मनिरपेक्षों को मुहतोड़ उत्तर देकर बाधा कड़ी करने वालों का मुँह बंद कर, समाधान चाहने वालों को मानसिक समर्थन देवें।
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
 विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक

Saturday, June 20, 2015

धर्म संचित अनुभव का नाम है, अनुमान नहीं

धर्म संचित अनुभव का नाम है, अनुमान नहीं 
धर्म को स्थिर रखने हेतु कठोर नियमो का पालन आवश्यक होता है... धर्म कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल नही कि समाज के किसी एक वर्ग, समुदाय को प्रसन्न करने हेतु... प्रयोग के उपयोग खेलते रहें आप।
ऐसे ही नही धर्मरक्षार्थाय, किसी को अवतार लेकर महाभारत रचता पड़ता है... परन्तु बिना हड्डी की जिव्हा से धर्मविरुद्ध वाणी का उपयोग करने में अधिक परिश्रम भी नही लगता।
आज भारत में या विश्व में धर्म का जो भी निम्नतर स्तर आप पाते हैं, उनके अपराधी वे समाज सुधारक हैं, जिन्होंने धर्म-शास्त्रों के अध्ययन किये बिना... अपने सुधार कार्यक्रमो को धर्म से ऊपर रखा। 
इन्ही लोगों द्वारा समर्थित लोकतन्त्र और धर्म-निरपेक्षता के योग से बने कैंसर का दर्पण देखिये... कि बुरे को बुरा कहना अपराध होता है और अच्छे को बुरा कहना कथित बुद्धिजीवी की अभिव्यक्ति की स्व्तंत्रता। 
आगम शास्त्रों में लिखे गए धर्म के नियमो के विरुद्ध जाकर, स्वयं को बुद्धिजीवी सिद्ध करने वालों की हठधर्मिता, बालपन, अज्ञानता और महामूर्खता ने आज सम्पूर्ण विश्व को विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है। 
ऐसे लोग कभी स्वयम् के व्यापार, व्यवसाय आदि में नियमो का उल्लंघन नहीं करते... असफलता और हानि के भय से, वहां वे अपने व्यवसाय से सम्बन्धित कुशल अनुभवी लोगों को ऊँचे वेतन देकर अपना कार्य करवाते हैं ... परन्तु धर्म के विषयों पर गूगल wikipedia से दो-चार श्लोक पढ़ कर यही लोग, कुतर्क करते हुए, प्रयाग के खेल में लग जाते हैं ... क्योंकि धर्म में हानि से इनके परिवार और व्यवसाय पर कोई प्रत्यक्ष हानि नही पहुँचती। 
जब धर्म की बात आती है तो एक पानवाला भी देवालयों को छोड़कर शौचालयों को पूजने की कु-शिक्षा देता दिखाई देता है... विश्व भरा पड़ा है ऐसे नासखेत बुद्धिजीवियों से।
Perception, Conception और Misconception में वही अंतर होता है, जो आकाश से लेकर भूमि तथा और भूमि से लेकर पाताल तक का अंतर होता है। 
धर्म के कार्य धर्मशास्त्रों पर ही छोड़ दिजिए... धर्म को आगे बढ़ाने का कार्य धर्म को अनुभव करने से चलता है... अनुमान, विपर्यय, निद्रा या स्मृति के आधार पर नही। 
जय श्री राम कृष्ण परशुराम वन्देमातरम। 
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Sunday, May 17, 2015

20 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन

17, मई 2015 आज 20 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन 


स्व. सुशीला देवी रेलन जी, की 20 वीं पुण्य तिथि ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी रविवार 17 मई 2015. 20 वर्ष पूर्व आपने नश्वर शरीर त्याग दिया, किन्तु हमारे ह्रदय मंदिर में आप सदा ही विराजमान रही हैं। हम सब आपको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।  
नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का
सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है| -युगदर्पण
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Sunday, May 3, 2015

बुद्ध जयन्ती

बुद्ध जयन्ती (बुद्ध पूर्णिमा, वेसाक या हनमतसूरी) बौद्ध मत में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख पर्व है। बुद्ध जयन्ती वैशाख  पूर्णिमा को मनाया जाता हैं। पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का स्वर्गारोहण समारोह भी मनाया जाता है। इस दिन 563 ई.पू. में बुद्ध स्वर्ग से संकिसा मे अवतरित हुए थे। इस पूर्णिमा के दिन ही 483 ई. पू. में 80 वर्ष की आयु में, देवरिया जिले के कुशी 
नगर में निर्वाण प्राप्त किया था। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों एक ही दिन अर्थात वैशाख  पूर्णिमा के दिन ही हुए थे। ऐसा किसी अन्य महापुरुष के साथ आज तक नही हुआ है। इस प्रकार भगवान बुद्ध विश्व के सबसे महान महापुरुष है। इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। विश्व में बौद्ध मत के 50 करोड़ से अधिक मतावलंबि  इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार हैं। अतः हिन्दुओं के लिए भी यह दिन पवित्र माना जाता है। यह त्यौहार भारत, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया तथा पाकिस्तान में मनाया जाता है। 
बुद्ध के ही बिहार स्थित बोधगया नामक स्थान हिन्दू व बौद्ध धर्मावलंबियों के पवित्र तीर्थ स्थान हैं। गृहत्याग के पश्चात सिद्धार्थ सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहाँ उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई। तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध की महापरिनिर्वाणस्थली कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर पर एक माह का मेला लगता है। यद्यपि यह तीर्थ महात्मा बुद्ध से संबंधित है, किन्तु  आस-पास के क्षेत्र में हिंदू धर्म के लोगों की संख्या अधिक है और यहां के मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वे बड़ी श्रद्धा के साथ आते हैं। इस मंदिर का महत्व बुद्ध के महापरिनिर्वाण से है। इस मंदिर का स्थापत्य अजंता  की गुफाओं से प्रेरित है। इस मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटी हुई (भू-स्पर्श मुद्रा) 6.1 मीटर लंबी मूर्ति है। जो लाल बलुई मिट्टी की बनी है। यह मंदिर उसी स्थान पर बनाया गया है, जहां से यह मूर्ति निकाली गयी थी। मंदिर के पूर्व भाग में एक स्तूप है। यहां पर भगवान बुद्ध का अंतिम संस्कार किया गया था। यह मूर्ति भी अजंता में बनी भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण मूर्ति की प्रतिकृति है। 
श्रीलंका व अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इस दिन को 'वेसाक' उत्सव के रूप में मनाते हैं जो 'वैशाख' शब्द का अपभ्रंश है।इस दिन बौद्ध अनुयायी घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से घरों को सजाते हैं। विश्व भर से बौद्ध मत के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थनाएँ करते हैं। इस दिन बौद्ध मत के ग्रंथों का पाठ किया जाता है। मंदिरों व घरों में बुद्ध की मूर्ति पर फल-फूल चढ़ाते हैं और दीपक जलाकर पूजा करते हैं। बोधिवृक्ष की भी पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं को हार व रंगीन पताकाओं से सजाते हैं।
वृक्ष के आसपास दीपक जलाकर इसकी जड़ों में दूध व सुगंधित पानी डाला जाता है।। इस पूर्णिमा के दिन किए गए अच्छे कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है। पिंजरों से पक्षियॊं को मुक्त करते हैं व गरीबों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं। दिल्ली स्थित बुद्ध संग्रहालय में इस दिन बुद्ध की अस्थियों को बाहर प्रदर्शित किया जाता है, जिससे कि बौद्ध मतावलंबी वहाँ आकर प्रार्थना कर सकें।
वर्ष 2009 में बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 9 मई थी। भारत के अलावा कुछ अन्य देशों में यह 8 मई को भी मनाया गया। थाईलैंड के महानिकाय और धम्मयुतिका मतों ने 8श्रीलंका में 8 मई को मनाया गया। जबकि सिंगापुर में 9 मई को मनाया गया। 
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
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Friday, February 20, 2015

भगवान शंकर- हमारे पहले पैगंबर :मुफ्ती मो इलियास जमीयत

भगवान शंकर- हमारे पहले पैगंबर :मुफ्ती मो इलियास जमीयत 

अयोध्या।  जमीयत उलेमा के मुफ्ती मोहम्मद इलियास मानते है कि भगवान शंकर मुस्लिमों के पहले पैगंबर हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को मानने में मुसलमानों को कोई गुरेज नहीं है। इतना हीं नहीं आरएसएस द्वारा हिंदू राष्ट्र की मांग पर बात करते हुए, मौलाना ने कहा कि मुसलमान भी सनातन धर्मी हैं और हिंदुओं के देवता शंकर और पार्वती हमारे भी मां-बाप हैं। उन्होंने आरएसएस के हिंदू राष्ट्र वाली बात पर कहा कि मुस्लिम हिंदू राष्ट्र के विरोधी नहीं हैं। 
मुफ्ती मोहम्मद इलियास ने कहा कि जिस तरह से चीन में रहने वाला चीनी, अमेरिका में रहने वाला अमेरिकी है, उसी तरह से हिंदुस्तान में रहने वाला हर वयक्ति हिंदू है। यह तो हमारा राष्ट्रीय नाम है। उन्होंने कहा कि जब हमारे मां-बाप, खून और राष्ट्र एक है तो इस प्रकार हमारा धर्म भी एक है। हमारे धर्म का आरम्भ यहीं भारत से हुआ है। शंकर भगवान लंका में आए थे। हमारे इस्लाम धर्म के पहले पैगम्बर हैं। हम यहीं पैदा हुए हैं। यहीं हमारा कर्म और धर्म क्षेत्र है। इसलिए हमें इससे प्यार है। सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा। 
जमीयत उलेमा का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को अयोध्या आया था। जमीयत उलेमा 27 फरवरी को बलरामपुर में कौमी एकता का कार्यक्रम करने जा रहा है। इसी कार्यक्रम में अयोध्या के साधु-संतों को भी आमंत्रित करने के लिए प्रतिनिधिमंडल अयोध्या आया था। इस मध्य मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सतेंद्रदास और शनि धाम के महंत हरदयाल शास्त्री के साथ मिलकर आतंकवाद का पुतला फूंका। 
युगदर्पण की मान्यता है कि 67 वर्ष ऐसे राष्ट्र भक्त मुसलमान (श कै अब्दुल हमीद, डॉ अब्दुल कलाम, मुफ्ती मोहम्मद इलियास) प्रोत्साहन पाते, तो स्वतन्त्र भारत में आतंकवाद न होता, हिंसा न होती; प्रेम और सद्भाव होता। तब भारत विदेशी निवेश पर आश्रित न होता। 
स्वाईन फ्लु रोधी काढ़ा
आवश्यक घटक :-
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7 छोटी ईलाईची + 7 लोग + 7 तुलसी के पत्ते + 1 छोटा टुकड़ा अदरक + 1 टुकड़ा दालचीनी + 1/4 चम्मच हल्दी + 1/4 चम्मच  काला नमक + 4 कप पानी ! 
निर्माण विधी :-
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उपरोक्त सभी 
7 घटको को दिये गये मापानुसार, 4 कप पानी मे इतना उबाले कि पानी एक कप रह जाय, तत्पश्चात तैयार काढ़े को छानकर, एक शीशी में भर ले और प्रातः कालीन क्रिया से निवृत होकर, भूखे पेट दो-दो चम्मच, तीन दिन तक सेवन करे व अपने परिजनो को भी कराये। 
विशेष अनुरोध :- अधिक से अधिक शेयर कर, समाज को इस प्राण घाती संकट से मुक्त कराएं। जनहित में प्रेषित युगदर्पण मीडिया समूह
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कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक